उत्तर प्रदेश में कानपुर के चर्चित विनीत मिनोचा हत्याकांड में कहानी लगातार करवट ले रही है। जिस बहू शालू मिनोचा को शुरुआत में पुलिस द्वारा हत्या की साजिश में आरोपी बनाकर जेल भेजा गया था, वह 21 दिन बाद सोमवार को जेल से बाहर आ गईं। अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिलने पर रिहाई का आदेश दिया। पुलिस ने भी जांच के बाद शालू की भूमिका नहीं मिलने की बात कहते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
जेल से बाहर आने के बाद शालू ने पहली बार अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनके पति सुब्रत के मन में ऐसी कोई योजना चल रही थी। शालू के मुताबिक, उन्हें सिर्फ इतना पता था कि उनके पति और उनके पिता विनीत के बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे और अक्सर अनबन रहती थी, लेकिन यह विवाद हत्या की साजिश तक पहुंच जाएगा, इसका उन्हें अंदाजा नहीं था।
मुझे नहीं पता था कि पति के दिमाग में क्या चल रहा है
शालू ने बताया कि हत्या वाली रात वह अपने पति के साथ पार्टी में थीं। दोनों ने सामान्य तरीके से बातचीत की और साथ समय बिताया। उनके मुताबिक उस दौरान उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि घर पर क्या होने वाला है या उनके पति के मन में क्या चल रहा है, शालू ने सुब्रत के स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि वह काफी सेक्रेटिव नेचर के थे। पिता से उनकी अनबन रहती थी, लेकिन शालू ने कभी नहीं सोचा था कि मामला इतनी दूर तक पहुंच सकता है। इसी वजह से जब जांच में उनका नाम हत्या की साजिश से जोड़ा गया तो उनके लिए यह पूरा घटनाक्रम किसी सदमे से कम नहीं था।
विशाल से बातचीत पर भी दिया अपना पक्ष
जांच के दौरान शालू और पूर्व कर्मचारी विशाल के बीच बातचीत और उसके घर में आने को लेकर भी सवाल उठे थे। शालू ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि पार्टी वाले दिन विशाल से उनकी बातचीत केवल रंगोली के लिए फूल मंगाने को लेकर हुई थी। उनका कहना है कि उन्होंने गार्ड से विशाल की एंट्री कराने के लिए कहा था। शालू ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने गार्ड को विशाल के साथ किसी दूसरे व्यक्ति के आने की जानकारी नहीं दी थी और उन्हें आगे होने वाली किसी घटना की कोई जानकारी नहीं थी। घर की चाबी देने से जुड़े आरोपों पर भी वह पहले अपना पक्ष रख चुकी हैं।
21 दिन जेल में सबसे ज्यादा बेटे की याद आई
इस पूरी घटना के दौरान शालू के लिए इस पूरे मामले का सबसे भावुक पहलू उनका छह साल का बेटा है। जेल में बिताए 21 दिनों के दौरान उन्हें लगातार बेटे की चिंता सताती रही। रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके दिमाग में सिर्फ उनका बच्चा है। शालू चाहती हैं कि बच्चे को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी न हो। उनका कहना है कि अभी वह भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं। पति सुब्रत को माफ करना है या आगे उनके रिश्ते किस दिशा में जाएंगे, इस पर भी वह फिलहाल कुछ नहीं कहना चाहतीं। उनके मुताबिक, उन्हें इस सदमे से बाहर निकलने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।
जिस बयान से शालू पर शक गया, जांच में वही कहानी बदली
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में विशाल की ओर से शालू का नाम लिए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन बाद की पूछताछ में जांच का रुख बदल गया। पुलिस के अनुसार, सामने आए साक्ष्यों और पूछताछ के बाद मृतक के बेटे सुब्रत की भूमिका जांच के केंद्र में आई। पुलिस का दावा है कि विशाल ने बाद में बताया कि हत्या की साजिश सुब्रत ने रची थी और पकड़े जाने पर शालू का नाम लेने के लिए कहा गया था। इसके बाद सुब्रत को गिरफ्तार किया गया और शालू की भूमिका की दोबारा जांच की गई।
5 सितंबर की रात हुई थी कारोबारी की हत्या
पूरा मामला 5 सितंबर की रात का है। कानपुर के कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने विशाल और राजकिशोर को गिरफ्तार किया। इसके बाद हत्या की कथित साजिश में शालू का नाम सामने आया और उन्हें जेल भेज दिया गया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात अदालत में रखी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।
सुब्रत की भूमिका पर पुलिस ने आगे बढ़ाई जांच
पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ विनीत के बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसके कर्ज, पिता के साथ रिश्तों और संपत्ति से जुड़े विवादों समेत कई पहलुओं को जांच के दायरे में रखा। सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हत्या की साजिश से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की। हालांकि, मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। इसलिए पुलिस की ओर से सामने रखे गए आरोपों और दावों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
कोर्ट से मिली रिहाई, लेकिन जांच से नाता खत्म नहीं
अदालत ने शालू की न्यायिक अभिरक्षा समाप्त करते हुए 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहाई के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर कोर्ट या जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। 21 दिन जेल में रहने के बाद शालू अब अपने बच्चे के पास लौटना चाहती हैं। पति पर लगे आरोपों और हत्या की पूरी कहानी पर वह फिलहाल ज्यादा कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें पहले इस पूरे घटनाक्रम से बाहर निकलने के लिए थोड़ा समय चाहिए। इस बीच विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि हत्या की पूरी साजिश की कड़ी आखिर कहां जाकर जुड़ती है।
शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने कहा न्यायिक जीत
वकील शिवाकांत दीक्षित ने कहा कि शालू की रिहाई न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक, शुरुआत से ही उनका पक्ष रहा है कि शालू का नाम किसी अन्य व्यक्ति के बयान के आधार पर मामले में जोड़ा गया था। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस को शालू के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई, जिसके बाद शालू को राहत मिली।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि शालू को करीब 21 दिन जेल में रहना पड़ा, जबकि बाद की जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
कानपुर से संवाददाता अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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